प्रकाश क्या है? – पूरी जानकारी हिंदी में

Light: जब हम प्रकाश के बारे में सोचते हैं तो सामान्यतः हम दृश्य प्रकाश के बारे में सोचते हैं। इंद्रधनुष, फिल्में, पटाखों का प्रदर्शन तथा शहर क्षितिज हमारे मस्तिष्क में आते हैं। हम रेडियो तरंगों, X-किरणों या सूक्ष्म किरणों जैसे प्रकाश के बारे में नहीं सोचते क्योंकि हम उन्हें देख नहीं सकते हैं। जबकि ये किरणों तथा अवरक्त किरणें पराबैंगनी किरणें तथा गामा विकिरण भी प्रकाश में आते हैं, अदृश्य प्रकाश में।

प्रकाश ऊर्जा (Light Enery)

ऊर्जा के सभी रूप चाहे दृश्य हों या अदृश्य परमाणु होते हैं। इलेक्ट्रॉन के शुरू पास ऊर्जा की एक विशेष मात्रा होती है। यद्यपि एक इलेक्ट्रॉन अधिक ऊर्जा अवशोषित कर सकता है। बाद में इलेक्ट्रॉन एक छोटे पैकेट जिसे फोटॉन कहते हैं, में यह ऊर्जा छोड़ सकता है। चित्र को देखिए, फोटॉन के पास अतिरिक्त ऊर्जा की बिलकुल सही मात्रा है जो इलेक्ट्रॉन के पास अवशोषित थी न ज्यादा, न कम। प्रकाश इन्हीं फोटे ऊर्जा पैकेटों या फोटॉन से बना होता है।

वास्तव में, आप प्रकाश को फोटॉनों की एक धारा के रूप में सोच सकते हैं। फोटॉन की ऊर्जा इस बात पर निर्भर करती है कि एक परमाणु में इलेक्ट्रॉन कितनी ऊर्जा अवशोषित करते हैं तथा कितनी ऊर्जा फोड़ते हैं।

प्रकाश का सीधी रेखा में प्रवाह (Rectilinear Propagation of Light)

Light

प्रकाश सीधी रेखा में चलता है। प्रकाश की वह मात्रा जो सीधी रेखा के साथ चलती है प्रकाश की एक किरण बनाती है। प्रकाश किरणों का संग्रह प्रकाश का एक पुंज बनाता है। पुंज, समानांतर, अपसारी या अभिसारी हो सकता है।

एक समानांतर पुंज में किरणें होती हैं जो एक-दूसरे के समानांतर होती हैं। एक अपसारी पुंज में किरणों एक-दूसरे के समीप आती है तथा उनके बीच की दूरी घटती जाती है जब तक कि वे एक बिंदु पर मिल नहीं जातीं।

एक अभिसारी पुंज में अभिसरित या एक बिंदु से फैलने वाली किरणों होती है तथा उनके बीच की दूरी बढ़ती जाती है।

प्रकाश के बारे में कुछ तथ्य (Some facts about light)

1. प्रकाश वायु में धूल के कणों को उजागर करता है इसलिए प्रकाश का एक पुंज दिखाई देता है।
2. प्रकाश 3 x 10 मीटर प्रति सेकंड के वेग से सीधी रेखा में चलता है (यह अधिकतम चाल है जो हमें पता है)।

3. जब प्रकाश किरणें चिकनी सतह से टकराती हैं, वे वापस लौट जाती हैं, इसे परावर्तन कहते हैं।
4. यदि प्रकाश का पथ अपारदर्शी वस्तु द्वारा रोक दिया जाता है, तो एक छाया बनती है (अप्रकाशित अँधेरा क्षेत्र)।

5. समतल या गोलीय दर्पण के द्वारा प्रकाश के परावर्तन के कारण प्रतिबिंब बनते हैं, अतः प्रतिबिंब छाया से भिन्न होते हैं।

6. कोई भी अत्यधिक पॉलिश किया हुआ पदार्थ जो प्रकाश किरणों को पूर्णतः परावर्तित कर देता है, दर्पण कहलाता है।

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हम वस्तुओं को कैसे देखते हैं?

7. विभिन्न वस्तुएँ अपनी सतह से प्रकाश को परावर्तित करती हैं, यह परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों पर पड़ता है, इसलिए हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं।

8. प्रयोगात्मक रूप से प्रकाश की एक किरण प्राप्त नहीं हो सकती, जब हम प्रकाश की किरण कहते हैं, यह वास्तव में प्रकाश का एक पुंज (ढेर) होता है।

9. जब प्रकाश की एक किरण एक खुरदुरी सतह से टकराती है तो यह विभिन्न दिशाओं में फैल जाती है। इस प्रकाश का कुछ भाग हमारे कमरे में प्रवेश करता है तथा इसे आंशिक प्रकाशित बनाता है। इस प्रकाश को विसरित प्रकाश कहते हैं। यह इतना चमकीला नहीं होता जितना कि सूर्य का सीधा प्रकाश।

10. ये वस्तुएँ जिनमें से प्रकाश आर-पार हो जाता है, पारदर्शी वस्तुएँ कहलाती हैं। अपारदर्शी वस्तुओं में से प्रकाश आर-पार नहीं होता तथा अर्धपारदर्शी वस्तुओं से आंशिक प्रकाश आर-पार होता है।

सूची-छिद्र कमरा (Pin-hole Camera )

सूची-छिद्र कैमरा मूलतः एक बहुत ही साधारण कैमरा है जिसमें प्रकाश पार करने के लिए इसके मुख पर एक बहुत छोटा छिद्र होता है। इसमें गत्ते का एक हलका कसा हुआ बक्सा होता है। सूची-छिद्र के साथ बक्से का मुख एक काले कागज से ढका होता है तथा एक ट्रेसिंग कागज विपरीत दिशा में चिपका होता है। ट्रेसिंग कागज वापस में एक अर्धपारदर्शी पर्दे का कार्य करता है।

वस्तु, माना एक फूलदान को कैमरे के सूची-छिद्र के सामने रखते हैं। वस्तु के प्रत्येक भाग से प्रकाश सीधी रेखा में चलकर कैमरे के सूची-छिद्र से गुजरता है तथा अंततः ट्रेसिंग पेपर पर पड़ता है। प्रकाश के सीधे चलने के कारण वस्तु ट्रेसिंग पेपर पर प्रतिबिंब बनाती है।

प्रकाश की गति (Speed of Light)

अधिकांश वैज्ञानिकों का विश्वास है कि कोई भी प्रकाश की गति से अधिक तेज नहीं चल सकता, जोकि निर्वात में या बाहरी स्थान पर 300000 किलोमीटर प्रति सेकंड है। प्रकाश वायु तथा जल जैसे सघन माध्यम में कम गति से चलता है।

छायाओं का निर्माण (Formation of Shadow )

अब हम जानते हैं कि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है, अतः जब एक अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के मार्ग में आती है, तो वस्तु की एक छाया बनती है। यह छाया अपारदर्शी वस्तु के पीछे बनती है, जहाँ प्रकाश नहीं पहुँच सकता है। याद रखिए- पारदर्शी वस्तुएँ छाया नहीं बना सकतीं क्योंकि प्रकाश उनके पार चला जाता है। यद्यपि अर्धपारदर्शी वस्तुएँ हलकी छाया बनाती हैं क्योंकि वे थोड़े से प्रकाश को रोकती है।

सूर्य के प्रकाश द्वारा छायाओं का निर्माण होता है— सूर्य के प्रकाश द्वारा बनी छायाओं की लंबाई सदैव समान नहीं होती, यह सूर्य वस्तु तथा सतह द्वारा बनाए गए कोण में परिवर्तन के अनुसार परिवर्तित होती है। सुबह तथा शाम के समय छाया थोड़ी लंबी होती है, जबकि दोपहर में यह सबसे छोटी होती है, जब कोण एक समकोण होता है।

प्रकाश का परावर्तन (Reflection of Light)

चिकनी सतह से प्रकाश किरण का वापस लौटना प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।

परावर्तन से संबंधित पद :

आपतित किरण- दर्पण की ओर आती प्रकाश की किरण (AB आपतित किरण है)।
परावर्तित किरण- परावर्तन के बाद दर्पण से जाती किरण (CD परावर्तित किरण है)।

आपतन बिंदु- दर्पण पर वह बिंदु जहाँ आपतित किरण टकराती है (बिंदु P) ।

अभिलंब – आपतन बिंदु (P) पर लंब।

आपतन कोण- सामान्य किरण तथा आपतन किरण के बीच कोण

परातर्वन कोण- सामान्य किरण तथा परावर्तित किरण के बीच कोण

पाश्र्व परिवर्तन– समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब अपनी दाईं तथा बाईं भुजा को बदल लेते हैं। इस घटना को पार्श्व परिवर्तन कहते हैं।

समतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब का बनना (गुण) [Image Formed by Plane Mirror (Properties)]

  • प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
  • प्रतिबिंब आभासी तथा सीधा होता है।
  • दर्पण से वस्तु की दूरी दर्पण में प्रतिबिंब के बराबर होती है।

आभासी तथा वास्तविक प्रतिबिंब (Virtual and Real Image)

आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image)

जब प्रकाश की किरणें, परावर्तन के बाद अभिसारित हो जाती हैं तथा दर्पण के पीछे बिंदु से आती हुई प्रतीत होती हैं, तो इस प्रकार बने प्रतिबिंब को आभासी प्रतिबिंब कहते हैं।

वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image)

जब प्रकाश की किरणें परावर्तन के बाद अपसरित हो जाती हैं तथा वास्तव में विशेष बिंदु पर विभाजित होती हैं, इस प्रकार बने प्रतिबिंब, को वास्तविक प्रतिबिंब कहते हैं। वास्तविक प्रतिबिंब पर्दे पर लिए जा सकते हैं। सिनेमा के पर्दे के प्रतिबिंब वास्तविक होते हैं।

फोटोग्राफ वास्तविक प्रतिबिंब होते हैं।

समतल दर्पण के उपयोग

1. समतल दर्पण का उपयोग देखने वाले शीशे के रूप में होता है।
2. बॉक्सनुमा सौर कुकर में ये परावर्तक के रूप में उपयोग किए जाते हैं।
3. समतल दर्पणों का उपयोग पेरिस्कोप तथा कलाइडस्कोप बनाने में होता है।
4. समतल दर्पणों की पट्टियों का उपयोग खिलौनों में तथा आंतरिक सजावट के रूप में होता है।

गोलीय दर्पण (Spherical Mirrors)

यदि एक बड़े खोखले गोले के टुकड़े की दोनों सतहों पर सिल्वर पॉलिश कर दी जाए, तो इसे एक गोलीय दर्पण कहते हैं। आप प्रयोगशाला में प्रयोग के दौरान वॉच ग्लास का उपयोग करते हैं। इस पर सिल्वर पॉलिश करके गोलीय दर्पण प्राप्त कर सकते हैं।

यदि वाँच ग्लास की बाहरी सतह पर सिल्वर पॉलिश करते हैं तो यह अवतल दर्पण की भाँति व्यवहार करता है।

यदि वॉच ग्लास की भीतरी सतह पर सिल्वर पॉलिश करते हैं, तो यह उत्तल दर्पण की भाँति व्यवहार करता है।

गोलीय दर्पण से संबंधित पद (Terms Related to Spherical Mirror)

वक्रता केंद्र- गोले का केंद्र जहाँ दर्पण बनता है वक्रता केंद्र (C) कहलाता है।

ध्रुव- दर्पण के केंद्र को इसका ध्रुव (P) कहते हैं। मुख्य अक्ष- ध्रुव तथा वक्रता केंद्र को पार करने वाली अनंत रेखा दर्पण का मुख्य अक्ष कहलाती है।

फोकस– मुख्य अक्ष के समानांतर प्रकाश की किरण जो परावर्तन के बाद एक निश्चित बिंदु पर मुख्य अक्ष को काटती है। इस बिंदु को मुख्य फोकस कहते हैं।

फोकस दूरी- ध्रुव तथा वक्रता केंद्र के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं। प्रत्येक गोलीय दर्पण की फोकस दूरी हमेशा निश्चित होती है तथा F के द्वारा दर्शाई जाती है।

वक्रता त्रिज्या – ध्रुव तथा वक्रता केंद्र के बीच की दूरी को वक्रता त्रिज्या कहते हैं.

गोलीय दर्पण में परावर्तन के नियम (Rules of Reflection in Spherical Mirror)

नियम 1 : परावर्तन के बाद प्रकाश की किरण मुख्य अक्ष के समानांतर हो तथा फोकस से गुजरती हो।

नियम 2 : फोकस में से होकर आने वाली प्रकाश की किरणें परावर्तित होकर मुख्य अक्ष के समानांतर होती हैं।

नियम 3: वक्रता केंद्र से होकर जाने वाली किरणें दर्पण से परावर्तन के पश्चात् अपने ही मार्ग पर वापस लौट आती हैं।

अवतल दर्पण के उपयोग (Uses of Concave Mirror)

1. अवतल दर्पण का उपयोग शेविंग दर्पण के रूप में होता है। 2. अवतल दर्पण का उपयोग टॉर्चों तथा हेडलाइट्स में परावर्तक के रूप में होता है।
3. इसका उपयोग सौर कुकर में सूर्य की ऊमीय किरणों को फोकस करने में होता है।

उत्तल दर्पण के उपयोग (Uses of Convex Mirror)

इसका उपयोग वाहनों में पीछे का दृश्य देखने वाले दर्पण के रूप में होता है, क्योंकि यह पीछे से आने वाले वाहनों का छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

लेंस (Lens)

क्या आपने कभी अपने दादाजी को समाचार पत्र पढ़ते समय चश्मा लगाए हुए देखा है? क्या आप वॉच मेकर ग्लास के बारे में जानते हैं।

क्या आपने कॉन्टेक्ट लेंस के बारे में सुना है जो चश्मे के स्थान पर प्रयुक्त किए जाते हैं?

काँच का एक टुकड़ा जो दो पूर्ण वक्र सतहों से घिरा होता है लेंस कहलाता है। लेंस अपवर्तन द्वारा प्रतिबिंब बनाते हैं।

उत्तल लेंस के उपयोग

1. उत्तल लेस का उपयोग वस्तुओं को बड़ा करने वाले लेंस के रूप में होता है।

2. उत्तल लेंसों का उपयोग सूक्ष्मदर्शी तथा कैमरे में होता है।

3. विभिन्न फोकस दूरी वाले उत्तल लेंसों का उपयोग वृद्ध व्यक्तियों के चश्मों में होता है।

अवतल लेंस के उपयोग

1. बच्चों के चश्मों उपयोग होता है।

2. दूरदर्शी तथा अन्य प्रकाशिक यंत्रों में उपयोग होता है। क्या आपने कभी आकाश में इंद्रधनुष देखा है ?

क्या आपने कभी एक बेकार सी०डी० को सूर्य के प्रकाश में रखकर देखा है? उनके विभिन्न रंगों को पहचानने की कोशिश कीजिए।

तरंग गति तथा उच्च चाल के लिए सात रंगों का संयोजन सफेद जैसा दिखता है। जब एक प्रकाश किरण को एक प्रिज्म से गुजरते हैं तो यह सात रंगों में बिखर जाता है।

सबसे ऊपर का रंग लाल तथा सबसे नीचे का रंग बैंगनी होता है।

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