जल : एक प्राकृतिक संसाधन (Water: A Natural Resource)

  • निम्नलिखित पर ध्यान दीजिए
  • वर्षा कैसे होती है?
  • किसान वर्षा की प्रतीक्षा क्यों करते हैं?
  • रसोईघर में भोजन किस प्रकार पकता है?
  • जलयान और नाव कैसे तैरती हैं?
  • बांधों पर विद्युत कैसे उत्पन्न की जाती है?
  • चीनी उद्योग तथा वस्त्र उद्योग के लिए कच्ची सामग्रियों के अतिरिक्त सबसे अधिक अनिवार्य क्या है ?
  • हम अपने शरीर व वस्त्रों को किस प्रकार स्वच्छ रखते हैं?

उपर्युक्त सभी प्रश्नों का उत्तर जल है।

जल (Water)

पृथ्वी एक जलीय ग्रह है। महासागर पृथ्वी की सतह का 70 प्रतिशत भाग ढके हुए हैं। हमारी पृथ्वी पर उपलब्ध संपूर्ण जल का लगभग 97 प्रतिशत जल महासागरों में है। यह लवणीय नमकीन जल है। प्रति सौ किलोग्राम समुद्री जल में लगभग 3.5 किलोग्राम साधारण नमक होता है।

Water

शेष 3 प्रतिशत जल में से अधिकांश जल आर्कटिक महासागर की बर्फ की चट्टानों में तथा अंटार्कटिका महाद्वीप की बर्फ की विशाल चादरों में समाया हुआ है। ये बर्फ की चादरें अंटार्कटिका महाद्वीप के एक विशाल भाग को ढकती हैं। यह ताजा जल है।

शेष ताजा जल भूमि में तथा झीलों, तालाबों, धाराओं व नदियों में विद्यमान है। ताजे जल में नमक नहीं होता है। यह पेय जल है। यह भूमि पर समस्त पौधों तथा जंतुओं के लिए अनिवार्य है। एक वैज्ञानिक के लिए जल H,O है।

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पीने योग्य जल [Potable (Drinking) Water]

यद्यपि प्रकृति ने अत्यधिक मात्रा में जल उपलब्ध कराया है, फिर भी पेयजल का अभाव है। कुल उपलब्ध जल में से केवल 2% जल ही पीने योग्य है।

“पेयजल जीवाणु रहित होना चाहिए।”

यह स्वच्छ, गंधहीन और जल प्रदूषण से रहित होना चाहिए।

अतः हमें जल की प्रत्येक बूँद का प्रयोग सतर्कतापूर्वक करना चाहिए। हमें पीने योग्य जल का संरक्षण करना चाहिए। जल एक नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है-जल एक नवीकरणीय तथा असमाप्य (असीम) संसाधन है जो कभी समाप्त नहीं होता तथा यह प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा उचित समय में प्रतिस्थापित हो जाता है। अन्य नवीकरणीय स्रोत वायु तथा सूर्य का प्रकाश हैं। वन भी उपयुक्त समय में प्रतिस्थापित किए जा सकते हैं।

जल के स्रोत हैं-

1. नदियाँ,

2. झीलें और तालाब,

3. कुएँ और भूमिगत जल

भूमिगत जल अन्य स्रोतों के जल से अधिक शुद्ध होता है।

प्रकृति में जल चक्र-जल पृथ्वी से निरंतर वायु में ऊपर की ओर गति करता रहता है तथा वर्षा के रूप में पृथ्वी पर पुनः वापस आ जाता है। प्रकृति में जल का यह अनवरत परिसंचरण जल चक्र कहलाता है। गर्मियों में विभिन्न जल-निकायों का जल वाष्पित होता है। सभी पौधे प्रस्वेदन के समय जल वाष्प की अत्यधिक मात्रा मुक्त करते हैं। यह जल वाष्प वायु में ऊपर उठती है। उच्च वातावरण की वायु ठंडी होती है। ऊपरी वातावरण में जलवाप संघनित होकर सूक्ष्म बूंदों में परावर्तित हो जाती है।

  • भौम जल-स्तर अनेक मीटर की
  • गहराई पर हो सकता है और यह
  • सौ मीटर से अधिक की गहराई

जल की ये सूक्ष्म बूँदें आपस में जुड़कर बादल बनाती हैं। जब बादल और अधिक ठंडे हो जाते हैं, वे जल की भारी बूँदें बनाते हैं और वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं।

ठंडे मौसम में यह वर्षा जल ओलावृष्टि या हिमपात का रूप ले सकता है। वर्षा जल का एक विशाल भाग जल-निकायों में प्रवाहित होता है। वर्षा जल का कुछ भाग मृदा द्वारा अवशोषित हो जाता है और मृदरा के D-स्तर में भूमिगत जल के रूप में एकत्रित हो जाता है।

भूमिगत जल की परत की ऊपरी परिसीमा भौमजल स्तर कहलाती है। जल तल अलग अलग स्थानों पर भिन्न-भिन्न हो सकता है।

भूमिगत जल- जैसाकि हमने ऊपर पढ़ा, वर्षा का जल और अन्य जल-निकायों का जल मृदा के विभिन्न स्तरों से रिसकर या अवशोषित होकर अंततः तलशैल के स्तर तक पहुँच जाता है, जिसमें से रिसकर यह जल और नीचे नहीं जा पाता और अछिद्रित चट्टानों में संग्रहित हो जाता है। वर्षा जल का नीचे रिसना अंतःस्पंदन कहलाता है।

भूमिगत जल कुएँ खोदकर या नलकूप लगाकर प्राप्त किया जा सकता है।

प्रायः यह भूमिगत जल पीने के लिए सुरक्षित होता है क्योंकि यह रेत की मोटी परतों द्वारा छना हुआ होता है। लेकिन सीवरों, नालों और स्थानीय नदियों के अत्यधिक प्रदूषित जल के रिसने से आस-पास के क्षेत्र का भूमिगत जल प्रदूषित हो जाता है।

भौमजल स्तर का कम होना (Depletion of Water Table)

हैंड-पंप, कुएँ और नलकूप भूमिगत जल को प्राप्त करने के विभिन्न साधन हैं, जो वर्षा जल के रिसने से प्राकृतिक रूप से पुनः भर जाता है। परंतु सिंचाई और औद्योगिक कार्यों के लिए नलकूपों से भूमिगत जल का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है, इससे जल स्तर पर बहुत प्रभाव पड़ रहा है। अपर्याप्त वर्षा, बढ़ती जनसंख्या तथा वनों की कटाई जल स्तर के कम होने के अन्य घटक हैं।

वर्षा जल का संग्रहण (Rainwater Harvesting)

क्या आपने ‘जल पुरुष’ श्री राजेंद्र सिंह के विषय में सुना है जिन्होंने बहते हुए वर्षा-जल को सफलतापूर्वक राजस्थान की पोखरों और तालाबों में एकत्र किया और लोगों को जल के अभाव से स्वतंत्र किया था। उन्होंने सामुदायिक नेतृत्व के लिए सन् 2001 में मैग्सेसे पुरस्कार जीता। वर्षा जल संचयन भूमिगत टैंकों में जल को एकत्र करने की प्रक्रिया है।

इस एकत्र जल को घरेलू उद्देश्यों के लिए प्रयोग किया जा सकता है। सुनियोजित कॉलोनियों के ढलानों पर लगभग 20 सेमी० व्यास के गहरे गड्ढे खोदे जा सकते हैं तथा एक पी वी सी पाइप भूमि के अंदर डाला जा सकता है। अतः बहते हुए वर्षा-जल को इस गड्ढे में भेजा जा सकता है और जल स्तर की पुनः पूर्ति की जा सकती है।

जल प्रबंधन- वर्षा जल की संचयन प्रणाली

जल के उपयोग को न्यूनतम करना।
खुली टोंटी में दंत-मंजन व हजामत करने से बचिए। खुली टोंटी में बर्तन धोने से बचिए।
बहते शॉवर के नीचे स्नान करने से बचिए। एक बाल्टी व मग का प्रयोग बाल्टियों को किनारे से बाहर तक जल से मत भरिए)
गमले लगे पौधों में शाम को जल दीजिए और पानी देने के लिए फुहारे का प्रयोग कीजिए।
उद्योगों को जल का पुनः उपयोग करने के लिए जल उपचारित संयंत्र स्थापित करने चाहिए।
फसल-सिंचाई के लिए टपका-सिंचाई विधि को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

इसे भी प्रयोग कीजिए

  1. स्नानघर में स्नान के लिए एक बड़े टब का प्रयोग कीजिए।
  2. इसी जल का प्रयोग कपड़े धोने में कीजिए।
  3. शेष जल को एक पोंछे के साथ फर्श को साफ करने में प्रयोग कीजिए।
  4. और अंत में इस जल को अपने रसोईघर-बगीचे में अथवा गमले लगे पौधों में पानी देने के लिए प्रयोग कीजिए।
  5. आपने कितने जल का संरक्षण कर लिया ?
  6. इस विधि से आप प्रतिदिन अत्यधिक जल बचा सकते हैं।

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